पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड एक बार फिर उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। आमतौर पर महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के लाभ मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, लेकिन इस बार शुद्ध रिफाइनिंग कारोबार से जुड़ी कंपनियों के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल नजर आ रही हैं।

डीजल और हवाई ईंधन की किल्लत से ऐतिहासिक ऊंचाई पर रिफाइनिंग मार्जिन

वैश्विक स्तर पर डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) की सीमित आपूर्ति के चलते रिफाइनिंग मार्जिन में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है। डीजल क्रैक मार्जिन 6.6 डॉलर प्रति बैरल की छलांग लगाकर 84.4 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो वर्ष 2011 के बाद से अब तक का सबसे उच्च स्तर है। शोध रिपोर्ट के अनुसार, डीजल के भाव कच्चे तेल की तुलना में कहीं अधिक तीव्र गति से बढ़े हैं, जिससे शुद्ध रूप से रिफाइनिंग कार्य करने वाली कंपनियों का सकल रिफाइनिंग मार्जिन काफी मजबूत स्थिति में आ गया है।

एमआरपीएल में 22.6 फीसदी की संभावित बढ़त का अनुमान

इस बदले परिदृश्य में मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) निवेश के दृष्टिकोण से आकर्षक स्थिति में है। विश्लेषकों ने एमआरपीएल को 175.40 रुपये के भाव के मुकाबले 215 रुपये के लक्ष्य मूल्य के साथ खरीदारी की रेटिंग दी है, जो करीब 22.6 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दर्शाता है। कंपनी के पास डीजल का बड़ा एक्सपोजर होना और क्रूड के मुकाबले डीजल प्रीमियम में आ रही तेजी इस अनुमान का मुख्य आधार है।

चेन्नै पेट्रोलियम के लिए 1,540 रुपये का लक्ष्य निर्धारित

इसी प्रकार चेन्नै पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) के शेयर को भी विश्लेषकों ने खरीदारी की सूची में रखा है। इसके लिए 1,540 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया गया है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 6.1 प्रतिशत की संभावित वृद्धि की ओर संकेत करता है। कंपनी की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और लगातार बेहतर होता जीआरएम इसके वित्तीय प्रदर्शन को मजबूती दे रहा है।

विपणन कंपनियों पर दबाव, शुद्ध रिफाइनर्स को सीधा फायदा

कच्चे तेल की बढ़ती लागत जहां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी खुदरा ईंधन बेचने वाली कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रही है, वहीं अधिक डीजल उत्पादन क्षमता वाली रिफाइनिंग कंपनियों को मौजूदा वैश्विक संकट का सीधा लाभ मिल रहा है। उच्च रिफाइनिंग मार्जिन के चलते विश्लेषक शुद्ध रिफाइनिंग कंपनियों के शेयरों में निवेश को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।